रौशन बघेल ✍️
आज के दौर में पत्रकार बनने के लिए अब किसी मास कम्युनिकेशन की डिग्री, भाषा के ज्ञान या नैतिक मूल्यों की ज़रूरत नहीं बची है। आपके पास बस एक स्मार्टफोन, एक माइक और सोशल मीडिया (इंस्टाग्राम-यूट्यूब) पर एक अकाउंट होना चाहिए। कल तक जो लोग सड़क पर घूम रहे थे, वे आज खुद को 'स्वतंत्र पत्रकार' या 'डिजिटल क्रिएटर' घोषित कर चुके हैं। न लिखने का सऊर है, न कैमरे के सामने शालीनता से बोलने का ढंग। पत्रकारिता जैसे गंभीर और ज़िम्मेदार पेशे को इन 'व्यूज के भूखे' लोगों ने तमाशा बना दिया है।
टीआरपी और व्यूज की अंधी दौड़
- सड़कछाप भाषा का प्रयोग: यूट्यूब और इंस्टाग्राम पर तथाकथित पत्रकारों की भाषा गाली-गलौज और उकसावे से भरी है।
- सनसनीखेज थंबनेल: केवल क्लिक पाने के लिए भ्रामक और झूठी खबरें फैलाई जा रही हैं।
- संवेदनशीलता का अभाव: किसी हादसे या दुखद घटना में भी ये लोग पीड़ित के मुंह में माइक ठूंसकर 'आपको कैसा लग रहा है' जैसे संवेदनहीन सवाल पूछते हैं।
सत्ता और सरकार की चाटुकारिता
- दलाली और विज्ञापन का खेल: ग्राउंड रिपोर्टिंग के नाम पर ये डिजिटल पत्रकार स्थानीय नेताओं, प्रशासन और सरकारों की चाटुकारिता में लीन हैं।
- सवाल पूछने की हिम्मत गायब: जनता के असल मुद्दों (बेरोजगारी, महंगाई, स्वास्थ्य) पर बात करने के बजाय, ये लोग सत्ताधारियों का महिमामंडन करते हैं ताकि उन्हें सरकारी विज्ञापन और फंड मिल सके।
- पीआर एजेंसी में तब्दील: निष्पक्ष पत्रकारिता अब खत्म हो चुकी है; अधिकांश चैनल किसी न किसी राजनीतिक दल के 'प्रवक्ता' की तरह काम कर रहे हैं।
लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर गहरा आघात
- विश्वास का संकट: बिना किसी ट्रेनिंग और एथिक्स (नैतिकता) के काम कर रहे इन लोगों की वजह से समाज का मुख्यधारा की पत्रकारिता से भी भरोसा उठ रहा है।
- ब्लैकमेलिंग का नया धंधा: छोटे कस्बों और शहरों में यह प्रवृत्ति और खतरनाक हो चुकी है। माइक लेकर अवैध रूप से अधिकारियों और छोटे व्यापारियों को डराना-धमकाना आम बात हो गई है।
कड़े नियम जरूरी
पत्रकारिता कोई मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि समाज का आईना है। जब तक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और सरकार इन स्वयंभू पत्रकारों के लिए न्यूनतम योग्यता, आचार संहिता और कड़े नियम तय नहीं करती, तब तक यह चौथा स्तंभ इसी तरह खोखला होता रहेगा। जनता को भी अब जागरूक होना होगा और चाटुकारिता करने वाले इन 'डिजिटल विदूषकों' को अनफॉलो कर सही और गंभीर पत्रकारों का समर्थन करना होगा।


